झारखंड/पाकुड़: पाकुड़ प्रखंड अंतर्गत राजीपुर मोड़ के समीप निर्माणाधीन स्वयं सहायता समूह (SHG) भवन को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। निर्माण कार्य में लापरवाही तथा उपयोग की जा रही निर्माण सामग्रियों की गुणवत्ता को लेकर लोगों में असंतोष देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भवन निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है।
यह भवन फूलो-झानो की प्रतिमा के समीप बनाया जा रहा है, जिसे महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वयं सहायता समूहों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। ऐसे में निर्माण कार्य में सामने आ रही कथित अनियमितताओं ने परियोजना की पारदर्शिता और उद्देश्य दोनों पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन निर्माण कार्य आधे से अधिक पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक स्थल पर सूचना पट्ट (डिस्प्ले बोर्ड) नहीं लगाया गया है। सूचना पट्ट नहीं होने के कारण निर्माण एजेंसी, लागत, कार्य अवधि और तकनीकी स्वीकृति जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
लोगों का कहना है कि महिलाओं के विकास और आत्मनिर्भरता से जुड़ी योजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ लक्षित समूह तक पहुंच सके।
हालांकि, इस संबंध में निर्माण एजेंसी अथवा संबंधित विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से निर्माण कार्य की जांच कर पारदर्शी तरीके से कार्य पूरा कराने की मांग की है।
Author: ZahidMansori
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