नई दिल्ली/सिंगापुर। सिंगापुर के पूर्व वरिष्ठ राजनयिक बिलहारी कौसिकन ने पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि देश गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है और उसकी समस्याओं की प्रमुख वजह उसकी सेना की भूमिका है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार नहीं होते, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी अहमियत काफी कम होती।
इंटरनेशनल रिपोर्टिंग फ़ेलोशिप के तहत पत्रकारों के साथ आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में कौसिकन ने अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए उल्लेखनीय कूटनीतिक सक्रियता दिखाई, जिससे कम से कम अमेरिका की नजर में उसकी कूटनीतिक छवि को कुछ हद तक सुधारने में सफलता मिली।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कूटनीतिक उपलब्धियां किसी देश की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं कर सकतीं। उनके अनुसार, इससे पाकिस्तान की जनता की आर्थिक कठिनाइयां समाप्त नहीं होतीं और न ही देश के गहरे आर्थिक संकट में कोई बुनियादी बदलाव आता है।
बिलहारी कौसिकन ने कहा कि फिलहाल पाकिस्तान की स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर नहीं हुई है, जो राहत की बात है। इसके बावजूद उन्होंने माना कि देश की वास्तविक चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं और केवल विदेश नीति में मिली सीमित सफलता से इन समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि अमेरिका पाकिस्तान पर लगाए गए सभी प्रतिबंधों को पूरी तरह समाप्त करेगा। उनके अनुसार, पाकिस्तान को स्थायी सुधार के लिए आर्थिक मजबूती, संस्थागत सुधार और आंतरिक चुनौतियों पर गंभीरता से काम करना होगा।
Author: ZahidMansori
Fight against corruption's








