धुमकुड़िया भवनों के लाभुकों को मिले पारंपरिक वाद्य यंत्र, आदिवासी संस्कृति के संरक्षण का दिया गया संदेश

झारखंड/पाकुड़/पाकुड़िया। आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से समेकित जनजाति विकास अभिकरण (आईटीडीए) के तत्वावधान में बुधवार को पाकुड़िया प्रखंड सभागार में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महेशपुर के विधायक प्रोफेसर स्टीफन मरांडी तथा उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने संयुक्त रूप से धुमकुड़िया भवनों के लाभुकों के बीच पारंपरिक वाद्य यंत्रों का वितरण किया। इस अवसर पर सामुदायिक जीवन, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक प्रोफेसर स्टीफन मरांडी ने कहा कि झारखंड की वास्तविक पहचान उसकी समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और सामुदायिक जीवन पद्धति में निहित है। उन्होंने कहा कि धुमकुड़िया केवल एक भवन नहीं, बल्कि सामाजिक संस्कार, पारंपरिक ज्ञान, सांस्कृतिक शिक्षा और सामुदायिक एकता का केंद्र है। नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार आदिवासी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा इस दिशा में हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।

उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने कहा कि स्थानीय समुदाय आज भी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पूरी आत्मीयता और निष्ठा के साथ जीवंत बनाए हुए है, जो अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि धुमकुड़िया की अवधारणा आधुनिक समाज के लिए भी अनुकरणीय है। वर्तमान समय में, विशेषकर शहरी जीवन में, लोगों के बीच सामाजिक मेल-जोल और सामुदायिक सहभागिता लगातार कम होती जा रही है। सोशल मीडिया के माध्यम से लोग आभासी रूप से तो जुड़े हैं, किंतु वास्तविक जीवन में पारस्परिक संबंधों की गर्माहट और सामूहिक जीवन की परंपरा कमजोर होती जा रही है।

उपायुक्त ने कहा कि जनजातीय समाज ने अपनी संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं को आज भी पूरी निष्ठा के साथ संरक्षित रखा है। सामूहिक रूप से गीत-संगीत, उत्सव, सुख-दुःख की साझेदारी तथा सामाजिक समरसता के साथ जीवन जीने की परंपरा पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि धुमकुड़िया जैसी पारंपरिक संस्थाएं नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं, इसलिए इनका संरक्षण और सुदृढ़ीकरण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के दौरान लाभुकों ने पारंपरिक वाद्य यंत्र प्राप्त कर प्रसन्नता व्यक्त की तथा आदिवासी संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने का संकल्प लिया। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति ने पूरे कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग से सराबोर कर दिया।
इस अवसर पर भूमि सुधार उपसमाहर्ता, प्रखंड विकास पदाधिकारी, झामुमो केंद्रीय समिति की सदस्य उपासना मरांडी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में लाभुक उपस्थित थे।

ZahidMansori
Author: ZahidMansori

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