जम्मू कश्मीर/बिहार/नेपाल। जम्मू-कश्मीर के अरनिया थाना क्षेत्र में सामने आए कथित जाली भारतीय मुद्रा (एफआईसीएन) मामले में जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने का दावा किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में दो व्यक्तियों ने जाली नोटों के संभावित नेटवर्क, उससे जुड़े लोगों तथा नकली मुद्रा की आपूर्ति से संबंधित अहम जानकारियां साझा की हैं। बताया जा रहा है कि इस मामले का सुराग सेना की 9 कोर इंटेलिजेंस बटालियन से प्राप्त खुफिया सूचना के आधार पर मिला, जिसके बाद यह जानकारी जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ साझा की गई और अरनिया पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो लोगों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया।
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान विलियम खोखर और रघुवीर ने कथित रूप से बताया कि पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी तरसेम है, जबकि उसके दो सहयोगी रवि और संजीव भी इस गिरोह में शामिल हैं। तीनों फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। पूछताछ में यह भी दावा किया गया कि लगभग 50 लाख रुपये की जाली भारतीय मुद्रा क्षेत्र में लाई गई है तथा मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकेगा।
सूत्रों के अनुसार, विलियम खोखर ने बताया कि उसने जेके बैंक से लगभग 10 लाख रुपये का ऋण लिया था। इसी दौरान तरसेम ने उसे 10 लाख रुपये के बदले 30 लाख रुपये की जाली भारतीय मुद्रा देने का लालच दिया। बताया जाता है कि वह तरसेम के साथ दिल्ली गया, जहां से लगभग 6.50 लाख रुपये की जाली मुद्रा लाई गई। बाद में नोटों पर संदेह होने और पकड़े जाने के भय से उसने अधिकांश नकली नोट वापस कर दिए।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि विलियम के पास पांच जाली नोट रह गए थे, जिनमें से तीन उसने अपने एक रिश्तेदार को दे दिए। सूत्रों के अनुसार, वह रिश्तेदार इसी वर्ष मार्च में जम्मू हवाई अड्डे पर उन नोटों के साथ पकड़ा गया था। इसकी जानकारी मिलने के बाद विलियम ने अपने पास बचे दो नोट नष्ट कर दिए। उसने यह भी बताया कि वह लगातार तरसेम से अपने पैसे वापस मांग रहा था, जिसके बाद उसे लगभग 5 लाख रुपये लौटाए गए, जबकि शेष 5 लाख रुपये अभी भी बकाया हैं।
वहीं, रघुवीर ने पूछताछ में बताया कि उसने अपनी जमीन का एक हिस्सा लगभग 6.15 लाख रुपये में बेचा था। आरोप है कि तरसेम ने उसे 15 लाख रुपये की जाली मुद्रा देने का भरोसा दिया था, लेकिन उसे अब तक कोई नकली नोट प्राप्त नहीं हुआ।
सूत्रों का यह भी कहना है कि मुख्य आरोपी तरसेम के पास अभी भी बड़ी मात्रा में जाली भारतीय मुद्रा मौजूद हो सकती है। यहां तक कि उसके पास नकली नोट छापने वाली मशीन होने की भी आशंका जताई गई है। हालांकि, पुलिस इन सभी दावों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन कर रही है। जांच के तहत दोनों व्यक्तियों के मोबाइल फोन फोरेंसिक परीक्षण के लिए भेजे गए हैं, ताकि उनके संपर्कों और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तार से जांच की जा सके। चूंकि उनके पास से कोई जाली मुद्रा बरामद नहीं हुई, इसलिए पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
पुलिस की जांच अब मुख्य रूप से फरार आरोपी तरसेम, रवि और संजीव की तलाश पर केंद्रित है। इस मामले में पुलिस की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों का कहना है कि मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही पूरे जाली मुद्रा नेटवर्क, उसके स्रोत तथा क्षेत्र में पहुंची नकली भारतीय मुद्रा की वास्तविक मात्रा का खुलासा हो सकेगा। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या यह जाली मुद्रा नेपाल के रास्ते बिहार लाई गई थी और वहां से अन्य राज्यों तक पहुंचाई गई। फिलहाल इस संबंध में पुलिस द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
Author: ZahidMansori
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