पुलिस मुठभेड़ में मुख्य आरोपित नंदन यादव के पैर में लगी गोली, हरेराम यादव भी दबोचा गया
बिहार/जमुई: सदर थाना क्षेत्र के मड़वा पहाड़ इलाके में नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ हुई अमानवीय घटना के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने अब तक पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो मुख्य आरोपित नंदन यादव और हरेराम यादव को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के दौरान नंदन यादव ने पुलिस पर गोलीबारी की, जिसके बाद हुई जवाबी कार्रवाई में उसके दाएं पैर में गोली लगी। घायल अवस्था में उसे गिरफ्तार कर इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा गया।
मंगलवार को पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल ने प्रेस वार्ता कर पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सोमवार को तीन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। मंगलवार की सुबह पुलिस को सूचना मिली कि मामले के मुख्य आरोपित नंदन यादव और हरेराम यादव प्रतापपुर गांव के बाहर नदी के समीप झाड़ियों में छिपे हुए हैं। सूचना के आधार पर विशेष जांच दल (एसआइटी) ने तत्काल इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया।
पुलिस की घेराबंदी देखकर एक युवक भागने लगा। भागने के दौरान गिरने से उसके दाएं पैर में चोट लग गई। पुलिस ने उसे पकड़कर पूछताछ की, जिसमें उसने अपना नाम हरेराम यादव बताया। पूछताछ के आधार पर पुलिस को दूसरे मुख्य आरोपित नंदन यादव के ठिकाने की जानकारी मिली।
इसके बाद पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया। पुलिस अधीक्षक के अनुसार, पुलिस को देखते ही नंदन यादव ने गोलीबारी शुरू कर दी। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें उसके दाएं पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर उपचार के लिए सदर अस्पताल भेजा गया।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सोमवार को गिरफ्तार किए गए तीन आरोपितों तथा मंगलवार को पकड़े गए दोनों मुख्य आरोपितों को मिलाकर इस मामले में अब तक पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। गिरफ्तार दोनों मुख्य आरोपित बालिग हैं। प्रारंभिक जांच में उनके बालू और शराब के अवैध कारोबार से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस दोनों का आपराधिक इतिहास खंगाल रही है और घटना में शामिल अन्य आरोपितों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
वीडियो प्रसारित करने पर भी प्राथमिकी
घटना से संबंधित वीडियो को इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित किए जाने के मामले में पुलिस ने अलग से कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करना कानूनन अपराध है। इसी आधार पर साइबर थाना में अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस वीडियो प्रसारित करने वालों की पहचान और उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है।








