बिहार/मोतिहारी। सीमावर्ती क्षेत्रों में उर्वरक की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं नेपाल तस्करी के विरुद्ध जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 2000 बैग उर्वरक जब्त किए हैं। देर रात बनकटवा प्रखंड के बड़हरवा, रेगनिया, आठमोहन और बीजबनी गांवों में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 71वीं बटालियन, स्थानीय पुलिस तथा जिला कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर तस्करी के उद्देश्य से छिपाकर रखे गए उर्वरकों को बरामद किया।
प्रशासन के अनुसार इस मामले में जावेद अंसारी, विश्वनाथ राय, सिकंदर राय, सिखु राय एवं सुधीर राय के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जब्त किए गए उर्वरकों की जांच के साथ पूरे नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है।
छापेमारी के दौरान अगरवा गांव में कथित रूप से नकली डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) उर्वरक तैयार किए जाने का भी खुलासा हुआ। मौके से मिले साक्ष्यों के आधार पर प्रमोद राय एवं मदन राय के विरुद्ध भी प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। प्रशासन इस मामले की गहन जांच में जुटा है, ताकि इससे जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा सके।
जिला कृषि पदाधिकारी मनीष कुमार सिंह ने बताया कि यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में उर्वरक की कालाबाजारी, जमाखोरी और तस्करी के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रहेगा। किसानों को समय पर, उचित मूल्य पर और गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कृषि विभाग के अनुसार बनकटवा, आदापुर, छौड़ादानो एवं घोड़ासहन प्रखंडों के कई खाद विक्रेताओं और प्रतिष्ठानों के विरुद्ध पहले भी उर्वरक की कालाबाजारी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि उर्वरक की कालाबाजारी और नकली खाद की बिक्री किसानों के हितों के साथ गंभीर खिलवाड़ है। इससे किसानों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो पाती, उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ती है और नकली उर्वरकों के उपयोग से फसल उत्पादन भी प्रभावित होता है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई से न केवल किसानों के हितों की रक्षा होगी, बल्कि कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
Author: ZahidMansori
Fight against corruption's








