100 दिन में ही घिरी नेपाल की बालेन शाह सरकार, सड़कों पर लौटे प्रदर्शनकारी

नेपाल/काठमांडू। नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बालेन शाह को पदभार ग्रहण करने के मात्र 100 दिनों के भीतर ही जनाक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। जिन उम्मीदों और बदलाव के वादों के साथ युवा मतदाताओं ने उन्हें सत्ता तक पहुंचाया था, वही जनता अब उनकी सरकार से जवाब मांग रही है।
मार्च में प्रधानमंत्री बनने वाले बालेन शाह को भ्रष्टाचार, राजनीतिक परिवारवाद और पारंपरिक राजनीति से निराश युवाओं ने परिवर्तन के प्रतीक के रूप में देखा था। रैपर, इंजीनियर और फिर राजनेता बने शाह 2025 में हुए जनआंदोलन के बाद उभरे नए राजनीतिक नेतृत्व का चेहरा माने गए थे।
हालांकि, सरकार बनने के तीन महीने के भीतर ही राजधानी काठमांडू में विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए हैं। हाल ही में त्रिपुरेश्वर स्थित पासपोर्ट विभाग के बाहर बड़ी संख्या में युवाओं ने प्रदर्शन किया। वे 25 वर्षीय राइड-शेयर चालक गणेश नेपाली को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए थे, जिन्होंने ट्रैफिक पुलिस के साथ जुर्माने को लेकर हुए विवाद के बाद कथित रूप से आत्मदाह कर लिया था।
गणेश नेपाली की मौत ने सरकार के खिलाफ असंतोष को और बढ़ा दिया है। प्रदर्शनकारी नदी किनारे रहने वाले अनधिकृत निवासियों को हटाने की कार्रवाई, पुलिस के कथित दुर्व्यवहार तथा प्रशासनिक फैसलों का विरोध कर रहे हैं। कई प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री बालेन शाह के इस्तीफे की भी मांग की है।
उधर, सरकार के भीतर कैबिनेट स्तर पर जारी अस्थिरता और कुछ नीतिगत निर्णयों को लेकर भी असंतोष बढ़ा है। विश्लेषकों का मानना है कि जिन नारों और वादों के सहारे बालेन शाह सत्ता में पहुंचे थे, अब वही मांगें उनकी सरकार के सामने चुनौती बनकर खड़ी हैं।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, नेपाल में परिवर्तन की उम्मीदें अब भी जीवित हैं, लेकिन जनता चाहती है कि सरकार अपने वादों को धरातल पर उतारे। ऐसे में बालेन शाह के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता का विश्वास बनाए रखने और बढ़ते जनाक्रोश को शांत करने की है।

ZahidMansori
Author: ZahidMansori

Fight against corruption's

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