96 वर्ष की उम्र में ‘धरती पकड़’ नागरमल बाजोरिया का निधन, 280 से अधिक चुनाव लड़कर बनाई अनूठी पहचान

बिहार/भागलपुर। चुनावी राजनीति में हार-जीत की परवाह किए बिना लोकतंत्र के पर्व में लगातार भागीदारी निभाने वाले भागलपुर निवासी नागरमल बाजोरिया उर्फ ‘धरती पकड़’ का निधन हो गया। उन्होंने 96 वर्ष की आयु में राजधानी पटना में अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से वृद्धावस्था से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे।
उनके निधन की खबर मिलते ही भागलपुर के सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। उनका पार्थिव शरीर पटना से भागलपुर लाया जा रहा है। गुरुवार को बरारी स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
280 से अधिक बार चुनावी मैदान में उतरे
नागरमल बाजोरिया ने नगर निकाय के वार्ड चुनाव से लेकर राष्ट्रपति पद तक 280 से अधिक चुनावों में अपनी दावेदारी पेश की। लगातार चुनाव लड़ने की उनकी जिद और जज्बे के कारण भागलपुर में उन्हें ‘धरती पकड़’ के नाम से जाना जाता था। चुनावों में उन्हें लगातार हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी चुनावी मैदान छोड़ने का मन नहीं बनाया।
उन्होंने देश की चर्चित लोकसभा सीटों से भी चुनाव लड़ा। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ रायबरेली और राजीव गांधी के खिलाफ अमेठी से चुनाव मैदान में उतरकर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं। वर्ष 2012 में उन्होंने प्रणब मुखर्जी के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी नामांकन दाखिल किया था।
93 वर्ष की उम्र में तीन लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ने की तैयारी
नागरमल बाजोरिया का चुनाव लड़ने का जुनून उम्र बढ़ने के साथ भी कम नहीं हुआ। 93 वर्ष की उम्र में उन्होंने एक साथ पुरानी दिल्ली, रायबरेली और पटना साहिब लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था।
उस समय उनकी शारीरिक स्थिति काफी कमजोर थी। उन्हें चलने और बोलने में कठिनाई होती थी तथा उम्र संबंधी स्मृति समस्याओं से भी वे जूझ रहे थे। इसके बावजूद चुनाव प्रचार के लिए उन्होंने एक मारुति वैन तक खरीदी थी। यह उनके अदम्य उत्साह और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी गहरी आस्था को दर्शाता है।
पेयजल संकट दूर करने के लिए कराया था नलकूप का निर्माण
नागरमल बाजोरिया केवल चुनाव लड़ने के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों के लिए भी जाने जाते थे। बताया जाता है कि क्षेत्र में पेयजल संकट को दूर करने के लिए उन्होंने अपने निजी खर्च से नलकूप लगवाए थे।
लाहौर से आकर भागलपुर में बसे थे
नागरमल बाजोरिया और उनका परिवार वर्ष 1930 में पाकिस्तान के लाहौर से भागलपुर आकर बस गया था। इसके बाद भागलपुर ही उनकी कर्मभूमि बन गया। दशकों तक वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे।
उनकी पहचान एक ऐसे शख्स के रूप में बनी, जिसने चुनावी हार को कभी अपने उत्साह पर हावी नहीं होने दिया। लोकतंत्र में भागीदारी को ही अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता मानने वाले ‘धरती पकड़’ के निधन से भागलपुर ने एक अनूठे व्यक्तित्व को खो दिया है।

ZahidMansori
Author: ZahidMansori

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