बिहार/रक्सौल। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल में एक नाबालिग किशोरी को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रेम, विवाह और नौकरी का झांसा देकर नेपाल ले जाने की कथित साजिश का संयुक्त सुरक्षा अभियान के दौरान पर्दाफाश हुआ। समय रहते कार्रवाई करते हुए एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू), 47वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), बीआईटी टीम तथा सामाजिक संगठनों ने किशोरी को सुरक्षित बचा लिया।
जानकारी के अनुसार, भारत-नेपाल मैत्री पुल पर नियमित जांच के दौरान संयुक्त टीम ने एक युवक और उसके साथ जा रही नाबालिग किशोरी को रोककर पूछताछ की। दोनों के बयान संदिग्ध प्रतीत होने पर गहन जांच की गई। जांच में सामने आया कि किशोरी की आरोपी से पहचान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म स्नैपचैट के माध्यम से हुई थी।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपी ने किशोरी को प्रेम, विवाह और नौकरी का झांसा देकर नेपाल ले जाने की योजना बनाई थी। अपनी पहचान छिपाने के उद्देश्य से उसने किशोरी को बुर्का पहनने की भी कथित सलाह दी थी। संयुक्त टीम ने तत्परता दिखाते हुए किशोरी को सुरक्षित संरक्षण में लिया तथा आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए हरैया थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया। मामले की विस्तृत जांच जारी है।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह घटना मानव तस्करों के बदलते तौर-तरीकों की ओर संकेत करती है। अब अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और झूठे वादों के माध्यम से मासूम बच्चों एवं युवाओं को अपने जाल में फंसाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों, समाज और युवाओं को विशेष सतर्क रहने की आवश्यकता है।
मानव तस्करी मानवाधिकारों पर गंभीर आघात है। इस प्रकार के अपराधों की रोकथाम के लिए सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता, सामाजिक जागरूकता और परिवारों की सजगता अत्यंत आवश्यक है।








