सुप्रीम कोर्ट के ‘बुलडोजर फैसले’ की जानकारी नहीं होने पर हाई कोर्ट ने NMC अधिकारियों को फटकारा

महाराष्ट्र/नागपुर। नागपुर हाई कोर्ट की पीठ ने नागपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (NMC) के अधिकारियों के उस दावे पर हैरानी जताई है, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के ‘बुलडोजर फैसले’ की जानकारी नहीं थी। अदालत ने टिप्पणी की कि इस फैसले की जानकारी एक आम व्यक्ति को भी है, लेकिन नगर निकाय के अधिकारियों को इसके बारे में जानकारी नहीं होना आश्चर्यजनक है। अधिकारियों में NMC के आयुक्त जैसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं।
न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की पीठ ने शुक्रवार को संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 4 सितंबर से पहले अलग-अलग शपथपत्र दाखिल करें। शपथपत्र में अधिकारियों को स्पष्ट करना होगा कि वे अपने पहले दिए गए स्पष्टीकरण पर कायम हैं या इस संबंध में कोई नया स्पष्टीकरण देना चाहते हैं।
अदालत महल दंगा मामले के मुख्य आरोपी फहीम खान की 69 वर्षीय मां मेहरुन्निसा शमीम खान और 96 वर्षीय अब्दुल हफीज की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अब्दुल हफीज की संपत्ति के एक हिस्से को इसलिए ध्वस्त कर दिया गया, क्योंकि उनके एक रिश्तेदार का नाम महल दंगा मामले में आरोपी के रूप में सामने आया था।

नोटिस के तुरंत बाद कार्रवाई पर सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष मुख्य सवाल यह था कि नगर निकाय ने नोटिस जारी करने के बाद कितनी तेजी से और किस प्रक्रिया के तहत ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
अदालत ने 10 जुलाई को NMC को निर्देश दिया था कि वह पिछले दस वर्षों के दौरान ऐसे मामलों का रिकॉर्ड प्रस्तुत करे, जिनमें नोटिस की अवधि समाप्त होते ही कथित अनधिकृत या अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया हो।

NMC ने अदालत को बताया कि उसके आधिकारिक रिकॉर्ड में पिछले दस वर्षों के दौरान ऐसा कोई मामला नहीं मिला, जिसमें नोटिस की अवधि समाप्त होते ही इस प्रकार की तत्काल कार्रवाई की गई हो।
इस पर न्यायाधीशों ने अन्य मामलों में अदालत के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि एक दशक से अधिक समय से न्यायालयों द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाने के बावजूद नगर निकाय द्वारा उनका प्रभावी पालन नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने पर मांगा जवाब
पीठ ने 13 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए ‘बुलडोजर फैसले’ के तहत जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन को लेकर भी NMC से सवाल किया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि किसी भी भवन या ढांचे को ध्वस्त करने से पहले संबंधित व्यक्ति को कम से कम 15 दिन का नोटिस दिया जाना आवश्यक है। यह व्यवस्था उन परिस्थितियों में भी लागू होगी, जहां किसी कानून के तहत इससे कम अवधि, जैसे 24 घंटे का नोटिस, देने का प्रावधान हो।
हाई कोर्ट ने NMC अधिकारियों के इस दावे पर गंभीर सवाल उठाते हुए उन्हें अपने रुख को स्पष्ट करने के लिए अलग-अलग शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।

ZahidMansori
Author: ZahidMansori

Fight against corruption's

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