दिल्ली। कनाडा के ओंटारियो स्थित नियाग्रा-ऑन-द-लेक में आयोजित विश्व जूनियर स्क्वैश व्यक्तिगत चैंपियनशिप 2026 में भारत की 18 वर्षीय अनाहत सिंह ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए महिला वर्ग का खिताब अपने नाम कर लिया। इसके साथ ही वह विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं।
विश्व रैंकिंग में 20वें स्थान पर काबिज और प्रतियोगिता की शीर्ष वरीयता प्राप्त अनाहत ने फाइनल मुकाबले में मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त रुकैया सलेम को सीधे गेमों में 11-3, 11-7, 11-9 से पराजित कर स्वर्ण पदक जीता। यह उनके करियर का अब तक का सबसे बड़ा खिताब माना जा रहा है।
पिछले वर्ष अनाहत ने इसी प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता था। इस बार उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए न केवल खिताब अपने नाम किया, बल्कि वर्ष 2010 के बाद विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियन बनने वाली पहली गैर-मिस्री खिलाड़ी भी बनीं। उनके इस विजय अभियान ने वर्ष 2011 से महिला वर्ग में मिस्र के खिलाड़ियों के लगातार चले आ रहे वर्चस्व का भी अंत कर दिया।
इससे पहले सेमीफाइनल में अनाहत ने मिस्र की बारब सामेह को चार गेमों में पराजित कर 21 वर्षों के बाद विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनने का गौरव प्राप्त किया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अनाहत सिंह को इस ऐतिहासिक सफलता पर बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि देश के युवाओं को प्रेरित करेगी तथा भारत में स्क्वैश खेल को नई पहचान और लोकप्रियता प्रदान करेगी।
यह जीत भारतीय स्क्वैश इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की खेल प्रतिभा को नई पहचान मिली है।








